जीवन की किताब मै रोज एक अध्याय जुड़ जाता है, जो हमे कुछ ना कुछ सिखा के जाता है | जब कल फिर एक नया दिन आएगा इस
धरती में नन्हे - नन्हे मेहमान आएंगे। पुराने कुछ मेहमान जीवन को अलविदा कह चुके होंगे तो कुछ नयी पीढ़ी को सहारा देंगे ।
एक दिन ऐसा
भी था जब
मै भी नन्हा
मेहमान बन कर
इस दुनिया मै
आया उस वक़्त
मेरी आँखे और
मुठी बंद थी, धीरे - धीरे माँ
के आँचल में
बड़ा होकर कब
ज़िम्मेदारियों का
बोझ आ गया
पता नहीं चला मैंने
भी दुखो के
बोझ को सहा
बरसातों में भीगा
सर्दियों मै कांपा भी गर्मियों की मार
मैंने भी सही
और कठिन दिनचर्या देखी, पर मन
कभी छोटा नहीं
किया
क्यूंकि जानता था
ये सब ज़िन्दगी के हिस्से होते हैं, जैसे
ऋतुएँ आती आती
जाती है, दिन - रात , सुबह – शाम , बारिश – धूप
लगी रहती है
इसी प्रकार सुख
दुःख भी आते
और जाते रहेंगे ।
और ये जीवन
भी एक मेला
है और इस
मेले में मैंने
कुछ अपने और
कुछ पराये खोये
और मै भी अपनों के लिए
खूब रोया जब
तक आँखे सूख
नहीं गयी, पर जीवन ही आगे
बढ़ने का नाम
था क्यूंकि जानता
था ये दुनिया के मेले
ऐसे ही होते
रहेंगे, मेला वही होगा पर
इस मेले में आने वाले मेहमान नए होंगे |
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Badiya
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