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ज़िन्दगी की कस्मकश |
मेरा जन्म गरीब परिवार मैं होने के कारण मेरी शादी किसी ऐसे व्यक्ति से तय हुई जो मुझ से उम्र मै 20 साल बड़ा था, तब तक सब खाते खराब नहीं थे, लेकिन वह मेरे लिए अच्छा नहीं था, पर मुझे लगता है की मेरी शादी एक हारे हुए व्यक्ति से हुई है उसने अभी तक कुछ भी गलत नहीं किया था पर लग रहा था की जैसे ज़िन्दगी की पतंग तूफानों मै उड़ रही हो जिसकी डोर टूटने का डर हर वक़्त रहता था।
मुझे खुद से प्यार है, मुझे अपनी उम्र, या बुद्धिमत्ता, या मेरा शरीर कैसा दिखता है, या मेरे व्यक्तित्व कैसा है अब कुछ परवाह किए बगैर जी रही थी मुझे अब तक इतना पता चल चुका था की जीवन मै किसका उपयोग कैसे करना है, क्योंकि कोई स्त्री जब अपने कंधो पर कोई ज़िम्मेदारी उठाने की सोच लेती है तो फिर उसके आगे हर पहाड़ छोटे होते चले जाते है। जो कुछ भी ठीक करना है मुझे खुद करना है अब सवाल था इस तूफ़ान से बाहर कैसे निकलू मैं कहती हूं कि मेरा क्या मतलब है, फिर भी मैंने बहुत साल बिताए। दिन के अंत में, मेरे पति को लगा कि मुझे उनकी जरूरत नहीं है, क्योंकि मैं बहुत सक्षम हूं, लेकिन वह गलत था मुझे सहारे की जरूरत थी। मुझे एक साथी, एक दोस्त की जरूरत थी। यहां तक कि कोई नहीं था जो ये देखे कि मैं अपने सिर को पानी के ऊपर रखने के लिए कितना कठिन काम करती रहती हूँ, मैं अपने दम पर हर किसी का प्रबंधन नहीं कर सकती भावनात्मक रूप से अलग-थलग होने के कारण मैं 5 साल तक बांझपन से जूझती रही मुझे उन वर्षों में कई दवाएँ और शॉट्स लेने पड़े, जिनके कारण शरीर थका हुआ, गर्म चमक, शरीर में दर्द और माइग्रेन की समस्या होने लगी पर उस एक गुलाबी फूल को देखने की चाह थी जिसके लिए सब सह रही थी कभी रिश्तेदारी मैं जाना चचेरे भाई के बच्चे के पहले जन्मदिन की तस्वीरें लेना (जिस बच्चे के लिए प्रयास करने के बाद कल्पना की थी), वह सिर्फ सहन करने के लिए बहुत कुछ है ... मैं अपने संघर्षों के साथ बहुत खुल्ला थी।
मेरे पति को यह भी पता नहीं था कि वो एक ऐसे इंसान हैं जिनसे मुझे समर्थन की आवश्यकता थी उन्हें कोई पता नहीं था। वह एक वयस्क के रूप में पांच साल का था उस तरह से समर्थन देने की क्षमता का अभाव था। दिनभर अपने फ़ोन पर गेम खेलना जिसे मैंने अनदेखा किया, ना मैंने कभी किसी मांग के लिए परेशान किया काफी कुछ सहने के बाद जीवन मै काफी दिलचस्प मोड़ आया कहा जा सकता है की भगवान को मुझपर तरस आ गया हो। हम तुम साथ-साथ तथा मैंने एक फूल सी बच्ची को जन्म दिया वो प्यार भरा एहसास मै कभी भूल नहीं सकती थी, जिसके बाद मेरे पति के स्वभाव मै भी बहुत सुधार हुआ और उस फूल के आने से लगा मानो ज़िन्दगी मै चारो तरफ उजाला ही उजाला छा गया हो, सबकुछ इतनी जल्दी सुधर गया मानो जैसे नींद से उठते ही बुरे स्वप्न का गायब हो जाना। मैं फिर से खुल्ली हवा मैं सांस ले सकती थी और बहुत खुश थी, फिर उसके बाद मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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