दूरदर्शन, जिसके नाम से ही भावना, आस्था, सौहार्द की अनुभूति होती है और हो भी क्यों न, भारत का एकमात्र सबसे पुराना और सरकारी चैनल है। जिसकी शुरुआत सितम्बर 1959 को दिल्ली मैं हुई इसका प्राचीन नाम आकाशवाणी था, कई दशकों से बिना शुल्क लिए भारत के कोने-कोने मैं अपनी सेवाएं प्रदान कर रहा है। यह देश का पहला ऐसा चैनल है जिसका विभिन्न भाषाओँ मैं प्रसारण भी किया जाता है। दूरदर्शन शुरू करने के लिए यूनेस्को ने भारत को 20 हजार डॉलर के साथ-साथ 180 फिलिप्स टेलीविजन सेट दिए और 03.11.2002 से दूरदर्शन का प्रसारण 24 घंटे किया जाने लगा।
1980 के दशक मैं प्रसारित होने वाले प्रसिद्ध धारावाहिक थे- मालगुडी डेज, ही मैन, अलिफ़ लैला, विक्रम बैताल, चित्रहार, ब्योमकेश बक्शी, शारुख खान की फौजी, रजनी, महाभारत, रामायण। महाभारत के समय तो सड़को पर कर्फू जैसा सन्नाटा पसर जाता था और रामायण की लोकप्रियता तो इस कदर थी की बहुत लोग घर को साफ़ सुथरा पूजा पाठ करके रामायण आने का इंतज़ार किया करते थे।
आज हम मैं से बहुत से लोग होंगे जिनकी कोई न कोई यादे इस से जरूर जुडी होगी, जो पारिवारिक चैनल होने के साथ लोगो की आस्था और भावना का भी ख्याल रख रहा है। पहले यह चैनल ब्लैक एंड वाइट मैं सेवा देता था परन्तु 1982 में रंगीन टेलीविजन आने के बाद व एशियाई खेलों का दूरदर्शन पर प्रसारण करने से लोगों का रूझान इस ओर अधिक बढ़ा जिसके परणामस्वरूप भारतीय टेलीविजन में कई तरह बदलाव आये । कृषि दर्शन सबसे लम्बे चलने वाला धारावाहिक था जिसका प्रसारण 1966 मैं किया गया था यह धारावाहिक देश मैं हरित क्रांति की लहर लेकर आया।
जब देश मैं कोरोना जैसे महामारी आई व सम्पूर्ण देश मैं लॉकडाउन लगा तो उस समय भी दूरदर्शन ने भरपूर कोशिश की व रामायण और महाभारत जैसे धार्मिक धारावाहिक का पुनः प्रसारण करके लोगो के दिलो मैं अपनी जगह को बरक़रार रखा परिणामस्वरूप 1986 मैं शुरू हुए रामायण व महाभारत ने 2020 मैं भी TRP के सारे कीर्तिमान रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए।
आज भी अगर देश मैं कुछ बड़े बड़े समारोह जैसे गणतंत्र दिवस, स्वंतत्रता दिवस, पुरस्कार वितरण, बजट, लोकसभा, राज्यसभा, विदेशी अतिथि आगमन, राष्ट्र्पति, प्रधानमंत्री व देश से सबंधित कोई भी सम्बोधन हो जिनको प्रसारण करने का अधिकार आज भी सिर्फ दूरदर्शन को है।
3 Comments
Nic Story
ReplyDeletenice
ReplyDeleteबहुत बढ़िया जनाब
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