हिन्दू धर्म की आस्था का प्रतीक कुम्भ मेला इस वर्ष 2021 मैं होने जा रहा है। माना जाता है की समुद्र मंथन के दौरान जब समुद्र मैं से अमृत से भरा कलश निकला तो अमृत पीने की हौड़ मैं देवता और राक्षस एक दूसरे के पीछे उसे प्राप्त करने के लिए भागते रहे जिसकी बूंदे 4 जगह गिरी –
- इलाहाबाद
के प्रयागराज गंगा यमुना और सरस्वती के संगम
पर
- नासिक
में गोदावरी नदी पर.
- उज्जैन
में शिप्रा नदी पर.
- हरिद्धार
में गंगा नदी पर.
इसी कारण इन्हीं चार जगहों पर कुंभ मेला लगता है। जो की हर 3 साल मैं आता है जिस कारण एक स्थान का नम्बर 12 साल मैं आता है। पहली बार यह 12 साल की बजाए 11 वें साल में आयोजित होगा. 2022 में लगने वाला कुंभ मेला गृह-नक्षत्रों की वजह इस साल हरिद्धार में होने वाला है। वैसे यह मेला 14 जनवरी से शुरू हुआ, कोरोना संक्रमण को देखते हुए पहले कुंभ मेले की अवधि 27 फरवरी से 27 अप्रैल तक प्रस्तावित की गई थी। हालांकि इससे पहले कुंभ मेला जनवरी से शुरू होकर अप्रैल तक, चार महीने के लिए आयोजित होता था। राज्य सरकार ने कुंभ मेले के लिए अब एक अप्रैल से 30 अप्रैल तक की अवधि निर्धारित की है, जो की अप्रैल आखिरी तक चलेगा । जिसमें प्रमुख स्नान शामिल हैं-
- सोमवती अमावस्ता (शाही स्नान) – 12 अप्रैल 2021.
- बैसाखी (शाही स्नान) – 14 अप्रैल 2021.
- चैत्र पूर्णिमा (शाही स्नान) – 27 अप्रैल 2021.
सरकार के निर्देश के बाद कुम्भ मेले मैं पंजीकरण और कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट लाना जरुरी। कोरोना महामारी की वजह से सरकार काफी सचेत है जिसके तहत गाइडलाइन्स जारी की है।
मेले मैं केवल
जरुरी सामानो की दुकान
खुली रहेगी - मेले
मैं केवल भोजन,
दवाये, पानी और पूजन
सामग्री जैसे दुकाने
खुली रहेगी, हालाँकि इसकी वजह
से यहाँ के
ब्यापारिओं में कुछ
नाराजगी भी है
परन्तु सरकार कोरोना बीमारी
की वजह से
भीड़ को नियंत्रण
करने के लिए
यह कदम उठा
रही है।
कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य - मेले मैं हिस्सा लेने के लिए आपको स्वास्थ्य
रिपोर्ट व कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट जरुरी है, अगर मेले मैं आपको कोई ऐसे लक्षण दिखे
जिससे आप अस्वथ महसूस कर रहे हो तो इसकी जानकारी तुरंत सुरक्षा अधिकारी या वॉलिंटियर्स
को बताये।
समय सीमा - स्नान घाट मैं भीड़भाड़ न हो इसके मद्धेनजर
समय सीमा भी तय की है, किसी भी जथे या अखाड़ा को 20 मिनट से ज़्यादा देर तक स्नान नहीं
करने दिया जायेगा। जिसकी निगरानी सुरक्षा बल करेगी।
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