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एक मुलाकात

 


"अजीब सी कस्मकस"

मैं अभी अपना होटल छोड़ कर जाने ही वाला था। जब मैं चलने लगा तो पीछे से कोई मेरा हाथ खींचते हुए कहने लगी "चलो कुछ दिखाती हूँ, जो आपका इंतज़ार कर रही है।
      मुझे उसकी बात कुछ अजीब सी लगी क्योंकि मै इस शहर मैं नया था और मेरे पास ज़्यादा समय भी नहीं था। लेकिन जब उसने मुझे अपना कप सौंपा, और उसी दरमियान उसने मेरी आँखों में देखा, तो यह सबसे अच्छी बात थी जिसका मैंने कभी स्वाद लिया।

"वो बारिश की बूंदे"

मेरा हाथ अभी भी झनझना रहा था जो उसने उसे पकड़ लिया। जैसे ही हम साथ-साथ पार्क से गुजर कर जाने लगे, हल्की-हल्की बूंदाबांदी होने लगी। मैंने अपने बैग से एक छाता निकाला, उसने अपना हुड निकाला और उसे पहन लिया….. "वह मूर्ख तो नहीं होगी ," क्योंकि  उसकी आँखों मैं एक अलग सी चमक थी मन मैं बहुत विचार चल रहे थे इतना सोचते ही वो कब मेरे साथ छतरी के नीचे गयी कुछ पता नहीं चला उसकी मुस्कान  सकारात्मक थी।

"यादें"

जैसे ही सूरज फिर से चमकने लगा, उसने मुझे एक बेंच पर बैठने के लिए नीचे खींच लिया। वह मुझ पर अपना हक़ जताने लगी और मैं केवल पीछे की ओर ताकने लगा जानता था ये सब गलत है इतने मैं वो बोलने लगी "आप किसको पसंद करते हैं?" वह फुसफुसाई, और मैंने दूर देखा। मैं कुछ कहना चाहता था, आप केवल एक ही चीज़ के बारे में सोच सकते हैं। आप बहुत खूबसूरत और प्यारे और मज़ेदार हैं और ... ' ये बोलने के बजाय, मैंने अपने कंधों को सिकोड़ लिया और अपने बैग को को देखने लगा

उसने खूबसूरत मुस्कान के साथ मेरी ओर देखा। "अगर मैं तुम्हें अपना बताती हूं, तो क्या तुम मुझे अपना कहोगे?"

मैंने कहा "अच्छा जी।"

"जिस लड़की को मैं पसंद करता हूं ...………वह आप हैं।"

क्योंकि ये  वो  लड़की  थी  जिसे  मैं  कॉलेज  मैं  पसंद  करता  था  और  आज  भी  उसका  इंतज़ार  कर  रहा  था।

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